बीमारी से बचने के टिप्स – Tips to stay away from diseases

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कीज्यादातर बीमारियां पेट की खराबी के कारण होती है। जिसका पेट ठीक होता है , वही हमेशा निरोगी रहता है। पेट में एसिडिटी, कब्ज नहीं होना चाहिए। जिसके पेट में एसिडिटी, कब्ज रहता है वह बार-बार बीमार पड़ता है। तोह इससे बचने के लिए आयुर्वेद में बहुत ही सरल और फायदेमंद उपाय बताये है, जिनके उपयोग से हम बीमारी से खुद को आसानीसे बचा सकते है।

  • शरीर में १३ प्रकार के वेग होते है। इन पे नियंत्रण होना जरुरी होता है।
  • खाना खाने के बाद रोज गुड़ और बडीसौफ खाने की आदत डाले। इससे खाना अच्छी तरह से हजम होता है और एसिडिटी भी नहीं होती।
  • ९०% बीमारी पेट ख़राब होने के कारण होती है।
  • मांसाहार की वजह से १६० प्रकार के रोग होते है। इसलिए मांसाहार बहुत कम करना चाहिए।
  • चाय पीनसे ८० प्रकार की बीमारिया होती है। यह अंग्रेज़ों की देन है। इससे बचने के लिए चाय पीना बंद करना चाहिए।
  • रोज सुबह तुलसी के पत्ते चबा-चबाकर खाने से सर्दी, बुखार, मलेरिया नहीं होगा।
  • शराब, कोल्ड ड्रिंक और चाय इनके लगातार सेवन से ह्रदय रोग होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए इनका सेवन न करें।
  • गुटका, सूअर का मांस, पिज़्ज़ा, बर्गर, सिगरेट, पेप्सी, कोक इनके लगातार सेवन से अतड़िया सड़ जाती है। तोह इनका सेवन तुरंत बंद करें।
  • खाना खाने के बाद तुरंत स्नान न करें। इसकी वजह से पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।
  • बालों को कलर लगाने से आंखों को तकलीफ होती है और आखें कमजोर हो जाती है। इसलिए हेयर डाई लगाना बंद करे।
  • गरम पानी से स्नान करने से शरीर की प्रतिकार शक्ति कमजोर होती है। गरम पानी कभी भी सर के ऊपर मत डालिये। इससे आखें कमजोर हो जाती है।
  • खाना खाते समय कभी भी खाने में और नमक न डाले। इसकी वजह से रक्तचाप, ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
  • ४८ क़िस्म के रोग एल्युमीनियम के बर्तन इस्तेमाल करने से होते है, और हम यह बर्तन हम हमेशा इस्तेमाल करते है। यह बर्तन अंग्रेज़ जेल में क़ैदियों को तकलीफ होने के लिए और वे स्वस्थ नहीं रह पाए इसलिए इस बर्तन में उन्हें खाना परोसते थें।
  • कभी भी पानी खड़े होकर नहीं पीना चाहिए। ऐसा करने से एड़ी का दर्द शुरू हो जाता है।
  • स्नान करते एकदम से सर के ऊपर से पानी न डालें। ऐसा करने से पैरालिसिस, हार्ट अटैक होने की संभावना बढ़ जाती है। सबसे पहले पैरों पे, घुटनों पे, पेट पर, छाती पर, कंधो पर पानी डालके स्नान करना चाहिए। फिर सर के ऊपर पानी डालिये। इसकी वजह से सर से रक्तसंचार पैरों की तरफ होता है और तकलीफ नहीं नहीं होती और चक्कर नहीं आती।
  • खाने वाला चुना ७० प्रकार के रोग ठीक करता है।
  • कभी भी जोर से न छीके। ऐसा करने से कान को तकलीफ होती है।
  • लगातार कफ हो तोह हमेशा मुलैठी लगाइये। कफ बहार निकलेगा और आवाज़ ठीक हो जाएगी।
  • हमेशे पानी ताज़ा पीना चाहिए। कुए का पानी सबसे अच्छा होता है। बोतले का, फ्रिज में रखा हुआ पानी कभी भी न पिए। इसकी वजह से नसे कमजोर हो जाती है।
  • पानी की वजह से होने वाली बिमारियों से बचने के लिए नींबू का नियमित सेवन करें। नींबू इन बिमारियों से लड़ने में सक्षम होता है।
  • खाने के लिए सैंधा नमक सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, उसके बाद कला नमक, फिर सफ़ेद नमक। लेकिन सफ़ेद नमक काफी खतरनाक होता है।
  • गेहू के अंकुरित बीज खानेसे से प्रतिकार शक्ति बढ़ती है।
  • खाना पकाने के बाद ४८ मिनिट के भीतर खाना चाहिए, नहीं तोह उसमे का पोषक तत्त्व नष्ट हो जाता है।
  • मिटटी के बर्तन में पकाया हुआ भोजन १००% पोषक होता है। काशा के बर्तन में पकाया हुआ खाना ९७% पोषक होता है। पीतल के बर्तन में पकाया हुआ लहना ९३% पोषक होता है। एल्युमीनियम के बर्तन में पका खाना ७-१३% पोषक होता है।
  • जले हुए जगह पे आलू का रस, हल्दी, शहद इसमें का कुछ भी लगाने पे ठंडक मिलती है और चोट ठीक हो जाती है।
  • गेहू का १५ दिन पुराना आटा उपयोग में न लाये। इससे तबियत ख़राब हो सकती है।
  • पैरों का अंगूठे को सरसो के तेल से मस्सगे करने से आखों की जलन, खुजली और लाली ठीक होती है।
  • १४ साल से कम उम्र के बच्चो को मैदे से बनाये हुए पदार्थ, बिस्कुट, समोसा न खिलाये।

इन बातों का खायल रखने से आपकी तबियत हमेशा ठीक रहेगी और आप बीमारी से बच सकते हो।


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